लहरों और किनारों का प्यार

उठा लहर समंदर में फिर से इक बार,
चाहता था किनारे से मिलने को इस बार।

सफलता की उड़ान
अभी तो पंख आये ही है, सफलता की पूरी उड़ान बाकी है | सफलता की तो बस अभी कल्पना की है, उसका हर सफ़र और अंजाम बाकी है | मेरी मंजिल एक ठिकाना नहीं, वो तो अगली मंजिल तक जाने का बहाना है | अभी तो पंख आये ही है, सफलता की पूरी उड़ान बाकी है...

सफलता की उड़ान

अभी तो पंख आये ही है, सफलता की पूरी उड़ान बाकी है | सफलता की तो बस अभी कल्पना की है, उसका हर सफ़र और अंजाम बाकी है | मेरी मंजिल एक ठिकाना नहीं, वो तो अगली मंजिल तक जाने का बहाना है | अभी तो पंख आये ही है, सफलता की पूरी उड़ान बाकी है...

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